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*कोरोना काल : पालक, बालक, शिक्षक… सबके लिए चुनौती* — राकेश नारायण (खरसिया)

  • 🏬 *कोरोना काल : पालक, बालक, शिक्षक… सबके लिए चुनौती* —  राकेश नारायण (खरसिया)
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🔯 कोरोना काल संकट का समय है और यह किसी न किसी रूप में हर व्यक्ति के लिए चिंता, परेशानी व समस्याओं का सबब है।
🔯 देश, देश की जनता, प्रशासन सभी के लिए यह समय एक चुनौती भरा है।
🔯 देश की सबसे बड़ी पूंजी मानव संसाधन है और खासकर बच्चे, जो किसी भी राष्ट्र के भविष्य होते हैं। देश का भविष्य आने वाली पीढ़ियों पर निर्भर करता है। और यह पीढ़ी अभी विद्यालयों से दूर है।
🔯 हवा, पानी, मिट्टी, रोटी, कपड़ा, मकान के साथ-साथ जो सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है वह है ‘शिक्षा’।
🔯 यदि पीढ़ियां शिक्षा से वंचित हो जाएं तो आने वाला भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
🔯 कोरोना काल में अन्य व्यवस्थाओं की तरह शिक्षा व्यवस्था भी बेहद प्रभावित हुई है।
🔯 इस संकट के समय में भी प्रशासन विभिन्न माध्यमों से व्यवस्था जारी रखने का प्रयास कर रहा है।
🔯 पढ़ाई तुंहर द्वार, मोटरसाइकिल गुरुजी, लाउडस्पीकर शिक्षा, आनलाईन, आफलाइन, जहां जैसा संभव हो, प्रशासन का प्रयास जारी है।
🔯 इस संकट में स्कूल, विद्यार्थी, शिक्षक, पालक, प्रशासन सब लाचार हैं। जब तक स्थिति नियंत्रण में या सामान्य न हो जाए विद्यालय में शिक्षा प्रदाय किया जाना संभव नहीं लग रहा।
🔯 यथासंभव आनलाईन कक्षाएं संचालित की जा रहीं हैं, प्रयास किया जा रहा है कि बच्चों की शिक्षा अनवरत जारी रहे।
🔯 नेटवर्क की समस्या, मोबाइल फोन की अनुपलब्धता, छोटे स्क्रीन, लगातार मोबाइल स्क्रीन पर केंद्रित न हो पाना, घर-परिवार का वातावरण स्कूल से अलग होना, जैसी समस्याओं के बीच बच्चे आनलाईन शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
🔯 आफलाइन कक्षा संचालित किए जाने में कोरोना संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा है जो शिक्षा व्यवस्था के समक्ष बहुत बड़ी समस्या है।
🔯 इन तमाम चुनौतियों के बीच हमें शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखना है, यह महत्वपूर्ण है।
🔯 इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि कोरोना काल में शिक्षक से कहीं बढ़कर पालक एवं परिवार की भूमिका हो गई है।
🔯 बच्चे पुस्तकों से दूर न हों, यह पालक, शिक्षक, परिवार सब की जिम्मेदारी है।
🔯 शिक्षक आनलाईन कक्षा में मार्गदर्शन कर ही रहे हैं लेकिन बच्चें पुस्तकों से दूर न हो पाएं इसकी मानीटरिंग का संपूर्ण भार पालकों पर ही है।
🔯 कोरोना काल आया है चला जाएगा लेकिन इस दौरान पढ़ाई में जो नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई किया जाना बहुत मुश्किल है।
🔯 पालक सुनिश्चित करें कि कोरोना काल में छुट्टी के दौरान बच्चे किताबों से दूर न रहें।
🔯 यदि बच्चों को किताबों से जोड़कर न रख पाएं तो उनकी आदतें बदलती जाएंगी जो आगे चलकर नुकसानदेह होगा।
🔯 बच्चे – टीवी, मोबाइल, खेलकूद, पढ़ाई इन सब में तालमेल करते हुए चलें और पालक इन बातों को सुनिश्चित करें।
🔯 निश्चित ही कोरोना काल संकट की घड़ी है, समस्या बहुत बड़ी है लेकिन समस्या में भी कुछ न कुछ समाधान की ओर कदम बढ़ाते रहना बेहद जरूरी है।

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