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जीवन का उद्देश्य The purpose of life

. जीवन हमारे जन्म से लेकर मृत्यु के बीच की कालावधी को जीवन कहते हैं।
उद्देश्य का अर्थ ध्येय से है। व्यक्ति के हर कर्म के पीछे एक ध्येय या मंशा रहती है। जिसके कारण व्यक्ति वह कर्म करते रहने के लिये प्रेरित होता है। उसे उद्देश्य कहते हैं |

जीवन का उद्देश्य
जीवन का उद्देश्य व्यक्ति के कर्म पर निर्धन करता है। जिस प्रकार व्यक्ति का कर्म होगा उसी प्रकार व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य भी होगा। वर्तमान समय में देखा जा सकता है किसी भी व्यक्ति का कोई उद्देश्य नहीं है। इसी वजह से व्यक्ति अपने मार्ग से भटकता है और उसे जीवन का उद्देश्य निर्धारित ना होने के वजह से जिंदगी भर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिन व्यक्तियों ने अपना उद्देश्य निर्धारित कर रखा है। वह एक निर्धारित स्थान (नोकरी-पेशा) में पहुंचकर उस स्थान को अपने जीवन का लक्ष्य समझकर, उसके अलावा किसी दूसरी और कभी पलट कर भी नहीं देखते हैं। जिससे उनकी बाकी की जिंदगी आरामदायक गुजर बसर होती हैं।

उद्देश्य का अर्थ
उद्देश्य एक पूर्वदर्शित लक्ष्य है जो किसी क्रिया को संचालित करता है अथवा व्यवहार को प्रेरित करता है। यदि लक्ष्य निश्चित तथा स्पष्ट होता है तो व्यक्ति की गाड़ी उस समय तक उत्साहपूर्वक चलती रहती है, जब तक वह उस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेता। इस लक्ष्य को प्राप्त करने को ही उद्देश्य की प्राप्ति कहतें हैं। संक्षेप में उद्देश्य की पूर्वदर्शित लक्ष्य है जिसको प्राप्त करने के लिए व्यक्ति प्रसन्नतापूर्वक उत्साह के साथ चिंतनशील रहते हुए क्रियाशील होता है।

उद्देश्य का महत्व
मानव जीवन के प्रत्येक पक्ष तथा दैनिक जीवन की प्रत्येक क्रिया को सफल बनाने के उदेश्य का विशेष महत्व होता है। बिना उद्देश्य के हम जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकते। चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक कोई भी क्षेत्र हो। उदाहरण के तौर पर हम सामाजिक क्षेत्र को ही ले लेते हैं। इसलिए कि हर व्यक्ति समाज से जुड़ा हुआ है, सामाजिक क्षेत्र में हर व्यक्ति की अलग पहचान है। कोई शिक्षक है, कोई डॉक्टर है, कोई इंजीनियर है, कोई वकील है, कोई किसान है, कोई मजदूर है, कोई विद्यार्थी है, कोई बेरोजगार है, कोई बेकार है। लोगों द्वारा चुने गए इनमें से प्रत्येक क्षेत्र व्यक्ति के उद्देश्य के महत्व को दर्शाता है। और यही इनका व्यक्तित्व पहचान है। समाज में जिसके लिए यह लोग जाने जाते हैं। जब तक समाज में सम्मिलित नहीं होंगे, उनका मान सम्मान नहीं होगा, उनके शब्दों को महत्व नहीं मिलेगा। तब तक समाज में उस व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता है इसलिए समाज में अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अपनी एक अलग पहचान बना कर समाज के सामने उपस्थित होना पड़ता है जिससे लोग उसको पहचाने और उसके महत्व को समझें यही जीवन के उद्देश्य का महत्व है।

उद्देश्य की आवश्यकता
अपने व्यक्तित्व को बनाए रखने के लिए हमें उद्देश्य की आवश्यकता पड़ती है। अगर अपने व्यक्तित्व को नहीं बनाया जाएगा तो आदमी और जानवर में कोई अंतर नहीं रहेगा जानवर का एक ही उद्देश्य होता है, भोजन। लेकिन मनुष्य के अनेकों उद्देश्य हैं, जिसके वजह से वह पूरी दुनिया में हर जीव जंतु से श्रेष्ठ और अलग है।

स्पष्ट उद्देश्य
जब व्यक्ति को किसी उद्देश्य स्पष्ट का ज्ञान होता है तो उसके मन में दृढ़ता तथा आत्मबल जागृत हो जाता है। इससे वह एकाग्र हो कर अपने कार्यों को पुरे उत्साह से करने लगता है। इससे व्यक्ति तथा समाज दोनों विकास की ओर अग्रसर होते रहते हैं। जिस शिक्षा का कोई उद्देश्य नहीं होता वह व्यर्थ है। ऐसी उद्देश्यविहीन शिक्षा को प्राप्त करके बालकों में उदासिनता उत्पन्न जो जाती है। परिणामस्वरूप उन्हें अपने किये हुए कार्यों में सफलता नहीं मिल पाती है। उद्देश्य के ज्ञान के बिना शिक्षक उस नाविक के समान होता है जिसे अपने लक्ष्य का ज्ञान होता।

केवल खाना-पीना, जीवन का उद्देश्य नहीं है।
जग में जगना और जगाना, जीवन का उद्देश्य है।

०अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए संघर्ष
०सुख प्राप्त करने के लिए संघर्ष
०बेरोजगार का लक्ष्य रोजगार है
०भूखे का लक्ष्य भोजन है।
०आज के अधिकांस युवा अच्छा रोजगार प्राप्त करना अपने जीवन का मूल उद्देश्य मानते हैं।

मनुष्य पृथ्वी पर उपस्थित सभी प्राणियों में श्रेष्ठ है और इस श्रेष्ठता का मूल है प्रकृति प्रदत्त मानव मस्तिष्क की शक्ति, उसकी कल्पनाशीलता दूरदर्शिता, विचारशीलता, आकलन संवेदना आदि। इन्ही गुणों के बल पर मानव ने अन्य जीवों पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध किया है। लेकिन अगर प्रकृति ने मनुष्य को इन विशेष गुणों से परिपूर्ण बनाया है तो इसके पीछे अवश्य ही कोई निश्चित उद्द्येश्य होगा। लेकिन जीवन का लाभ वही उठा पाते हैं जो इसके उद्देश्य को पहचानते हैं।
हमारी संस्कृति और इतिहास इस बात को प्रमाणित करते हैं कि सफल और महान उन्ही व्यक्तियों को कहा गया है। जिन्होंने अपने संचित ज्ञान का सदुपयोग किया और अधिक से अधिक प्रसार भी किया। अर्थात ज्ञान प्राप्त करना उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना महत्वपूर्ण उसका सदुपयोग और अधिक से अधिक हस्तान्तरण। चाहे वह विज्ञान का क्षेत्र हो, खेल-कूद, साहित्य, कला, चिकित्सा हो, हर क्षेत्र में महान और सफल हुए महापुरुषों की एक लंबी सूची है और इस सूची में उनका ही नाम है। जिन्होंने अपने संचित ज्ञान का अधिक से अधिक सदुपयोग किया और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया।

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