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पुसौर तहसील के एक बाबू ने 5 माह से दबाए रखा बाढ़ आपदा के 1405 आवेदन !

0 मुआवजा पाने भटक रहे 90 गांव के ग्रामीण
0 आरबीसी 6-4 के प्रकरणों को निपटाने दिलचस्पी नहीं दिखा रही तहसीलदार
0 कलेक्टर भीम सिंह को भी रखा गया अंधेरे में
रायगढ। यह जानकर आश्चर्य होगा की तेजतर्रार और संवेदनशील माने जाने वाले कलेक्टर भीम सिंह के अधीनस्थ काम करने वाले अधिकारी किस तरह बाढ़ आपदा के मामले में भी काम करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं मामला पुसौर तहसील का है जहां एक बाबू ने बाढ़ आपदा के 1405 आवेदनों को कूड़े में फेंक दिया है आरबीसी 6-4 के प्रकरणों को निपटाने में किसी तरह की गंभीरता अधिकारी भी नहीं दिखा रहे हैं। वही रोजाना सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मुआवजा पाने पुसौर तहसील के चक्कर लगा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार वर्षा ऋतु में पुसौर तहसील का पूरा क्षेत्र बाढ़ आपदा से प्रभावित हुआ था। तहसील अंतर्गत 148 ग्राम अतिवृष्टि और आपदा से प्रभावित हुए थे जिसमें से 90 गांव को अतिवृष्टि प्रभावित माना गया था। इन गांव के लोगों ने जुलाई अगस्त के महीने में पुसौर तहसील में बाढ़ आपदा मुआवजा के लिए आवेदन लगाया था सूत्रों की माने तो हजारों की संख्या में आवेदन तहसील कार्यालय में पहुंचे थे। जिसमें से 1405 आवेदन आज तक पेंडिंग पड़े हैं। बताया जा रहा है कि पुसौर तहसील के एक बाबू तुलाराम सिदार ने बाढ़ आपदा के आवेदन को कूड़े में डाल दिया था। लगभग 1405 आवेदन गोदाम में गठरी बांध कर फेंक दिए गए थे ऐसे में जब रोजाना ग्रामीण मुआवजा के लिए तहसील कार्यालय आने लगे तब जाकर तहसीलदार ने इन आवेदनों की खोज खबर की। बाद में पता चला तुलाराम सिदार बाबू ने सारे आवेदनों को गठरी बांध कर गोदाम में रखवा दिया है। जिसके बाद आवेदनों को निकाला गया तब तक 5 महीने का समय बीत गया। ग्रामीणों ने जुलाई अगस्त के महीने में अतिवृष्टि से मकान, फसल, जनहानि व पशु हानि के कई मामलों को लेकर पुसौर तहसील में आवेदन दिया था ताकि धारा आरबीसी 6-4 के तहत उन्हें मुआवजा मिल सके। लेकिन 5 महीने के बाद भी तहसील ने 1405 आवेदनों में कोई सुनवाई नहीं की। बताया जा रहा है कि जब इस बात की जानकारी तहसीलदार को लगी तब उन्होंने तुलाराम सिदार बाबू को शो का नोटिस जारी किया। साथ ही उस सेक्शन से बाबू को हटा दिया गया। अब एक नए बाबू को इसका जिम्मा दिया गया है।
कहा जा रहा है कि ग्रामीण बाढ़ आपदा का मुआवजा राशि ना मिलने से हलाकान हैं और वे मुख्यमंत्री से इस बात की शिकायत भी कर सकते हैं। ऐसे में तहसील के अधिकारियों के हाथ-पांव फूलते नजर आ रहे हैं सूत्रों की माने तो अभी 100-200 प्रकरणों को निपटाने की होड़ लगी हुई है लेकिन 1405 आवेदनों को कितने दिन में निपटाया जाए इसको लेकर बाबू एक दूसरे पर दोषारोपण भी कर रहे हैं। बहरहाल प्राकृतिक आपदा जैसे संवेदनशील मामले में भी पुसौर तहसील के अधिकारी कर्मचारी गंभीर दिखाई नहीं दे रहे हैं। अधिकारी कर्मचारी कलेक्टर को भी अंधेरे में रखे हुए हैं । अब देखने वाली बात होगी कि मुख्यमंत्री के आगमन के पहले इतने सारे आवेदनों को पुसौर तहसील कार्यालय कैसे निपटाता है।

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