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पाटनी पावर प्लांट अब अपनी अधिग्रहित राईतराई की जमीन को भी बेचने के फिराक में

प्लांट प्रबंधन ने तहसील न्यायालय में नाम परिवर्तन के लिए लगाया आवेदन

पूर्व में जामपाली और गोर्रा की जमीन का कर चुका है सौदा

रायगढ। गोर्रा और जामपाली के बाद अब पाटनी पावर प्लांट अपनी शेष बची ग्राम राईतराई की जमीन को भी नाम परिवर्तित कर अवैध खरीदी बिक्री के जुगत में लग गई है। पाटनी पावर प्लांट को रे इंडस्ट्रीज कराने के लिए तहसील न्यायालय में प्लांट प्रबंधन ने आवेदन लगाया है। अब दोनों गांव की तरह राईतराई की जमीन को भी रे इंडस्ट्रीज का बताकर इसकी खरीद बिक्री की तैयारी में कंपनी के डायरेक्टर लग गए हैं।

यहां बताना लाजिमी होगा कि पावर प्लांट लगाने के नाम पर पाटनी पावर प्लांट ने 10 वर्ष पूर्व 400 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी लेकिन कंपनी के कर्ता-धर्ता प्लांट नहीं लगा सके। बाद में कंपनी के संचालकों ने अवैध रूप से अधिग्रहित भूमि को प्लाट बनाकर बेचना शुरू कर दिया। भारत माला प्रोजेक्ट में जमीन जाने का भ्रम फैलाकर कंपनी ने सैकड़ों लोगों को जमीन बेच दी और उसकी रजिस्ट्री भी कर दी। कलेक्टर के पास मामला पहुंचने के बाद रजिस्ट्री विभाग ने कुछ समय के लिए पाटनी प्लांट के जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। वर्ष 2011 में पाटनी पावर प्लांट ने पुसौर ब्लाक के ग्राम गोर्रा, जामपाली व राईतराई में प्लांट लगाने के लिए तकरीबन 400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था बकायदा कंपनी ने प्लांट लगाने के लिए एएमयू साइन भी किया था लेकिन 10 साल बीतने के बाद भी पाटनी प्लांट ने उद्योग स्थापित नहीं किया जबकि नियमानुसार 5 साल के भीतर प्लांट नहीं लगाने पर अधिग्रहित भूमि प्रभावितों को लौटाई जाती है। लेकिन सरकारी तंत्र से सांठगांठ कर कंपनी 10 वर्षों से जमीन पर काबिज है। बताया जा रहा है कि कंपनी के अधिग्रहित जमीन का कुछ हिस्सा भारत माला प्रोजेक्ट में आ रहा है ऐसे में इसका फायदा उठाते हुए कंपनी के डायरेक्टर ने लोगों को झांसा देकर अधिग्रहित भूमि का सौदा करना शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि कंपनी के डायरेक्टर ने प्लाट काटकर कई रजिस्ट्री करा दी है जब इस बात को लेकर प्रशासन से शिकायत हुई तब पुसौर तहसील कार्यालय ने जांच शुरू की इस जांच में कई खुलासे हुए हालांकि जितनी भी रजिस्ट्री भारतमाला प्रोजेक्ट के नाम पर की गई थी उनमें से एक भी जमीन इस प्रोजेक्ट में नहीं जा रही है

कम्पनी ने भ्रम फैलाकर गोर्रा और जामपाली की जमीन का नाम परिवर्तित कर रे इंडस्ट्रीज कर दिया उसके बाद सैकड़ों एकड़ जमीन को प्लाट काटकर बेच दिया गया। अब कंपनी के पास एक और गांव राईतराई बची है जहां 10 से 12 एकड़ जमीन कंपनी के पास है अब इस जमीन को भी टुकड़े में बेचने के लिए कंपनी के हुक्मरानों ने तहसील न्यायालय में नाम परिवर्तन करने आवेदन लगाया है। अनेक खामियां होने के बाद भी पुुुसौर तहसील ने पाटनी पावर प्लांट और रेे इंडस्ट्रीज के मालिककानों पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की यही कारण है कि अधिग्रहित भूमि को टुकड़े में बेचकर करोड़ों रुपए का बंदरबांट कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों ने कर लिया।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन ऐसे मामलों पर कोई कार्यवाही करता है या नहीं।

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