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लाखों के कर्ज में डूबे किसान ने क्यों कहा “खुदकुशी ही एकमात्र समाधान है” ? मण्डी में धान नहीं बेच पाने से परेशान किसान की दास्तान…

👉 रायगढ़ :- छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर तय समय सीमा से लगभग आधा सफर पूरा कर लिया गया है। प्रदेशभर में 01 दिसंबर 2020 से धान खरीदी चालू है। इस साल लगभग 90 लाख मैट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। इस बीच कई जगहों से खबरें आ रही हैं कि अधिकांश धान खरीदी केंद्रों में बारदानों की कमी से किसान परेशान हो रहे हैं। लेकिन सिर्फ बारदानों की कमी ही किसानों की परेशानी का एक मात्र कारण नहीं है बल्कि कई किसान प्रशासनिक लापरवाही एवं तकनीकी खामियों के कारण भी मण्डियों में धान नहीं बेच पा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला धरमजयगढ़ के कापू क्षेत्र के टोनाहीनारा गाँव का है। जहाँ का एक किसान धरमपाल कुजूर नामक व्यक्ति ने कापू स्थित धान खरीदी केंद्र में धान नहीं बेच पाने के कारण परेशान है। वहीं धरमपाल कुजूर का कहना है कि वह लगातार चार – पांच सालों से कापू मण्डी में धान बेचते आ रहा है। इस वर्ष उनके क्षेत्र के हल्का पटवारी किसी बात पर कहा सुनी हो जाने पर इस बार उसके जमीन का रकबा को घटाकर शून्य कर दिया गया है। जिसके कारण पंजीयन कराने के बावजूद पंजीकृत किसानों की सूची में उसका नाम नहीं दर्शा रहा है। जिसके कारण अब वह धान का एक दाना तक नहीं बेच पाया है। वहीं पीड़ित किसान धरमपाल कुजूर ने बताया कि वह मण्डी से लेकर पटवारी, तहसीलदार, एवं यहाँ तक कि स्थानीय विधायक महोदय के पास भी अपनी परेशानी दूर करने की मिन्नतें कर चुका है। लेकिन कहीं भी उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उसने यह भी बताया कि वह लाखों के कर्ज में डूबा हुआ है, और यदि वह धान नहीं बेच पाता है तो वह अपना कर्ज नहीं चुका पाएगा और ऐसे में उसके सामने खुदकुशी करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचेगा। अब यह देखना होगा की उसके नाम की रकबा को जोड़ दिया जाता है या फिर मजबूरन उसके आत्महत्या करने की इंतजार की जाती है?

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