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पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने कहा युवाओं के साथ गलत होने नहीं दूंगा, कहा – परीक्षा की वीडियोग्राफी सार्वजनिक करे CGPSC

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रायपुर :-वीरेन्द्र नाम के व्यक्ति ने CGPSC के चेयरमैन को एक पत्र लिखा वो अपने आप में एक संदेहास्पद और दुःख पैदा करता है । जिसके कारण इस सरकार के प्रति हरेक युवा के मन में आक्रोश है ।संदेह यह पैदा करता है कि एक कैंडिडेट बोलता है कि मेरे पीछे एक पर्टिकुलर नंबर का अभ्यर्थी अनुपस्थित था एवं लिस्ट जब आती है तो को अनुपस्थित था उसका नाम लिस्ट में आ जाता है ।इसके बाद CGPSC का एक प्रेस विज्ञप्ति आया जिसमें कहना है कि हमने जांच कि जिसमें ऐसा कुछ भी ग़लत नहीं पाया गया । इस पर ओपी चौधरी जी कहते हैं कि ये तो वही बात हो गई जिसपर आरोप लगे हैं वो ही जांच करे , ये कैसे संभव है । इस पर PSC को वीडियोग्राफी सार्वजनिक करना चाहिए ।

अभी जो असिस्टेंट प्रोफेसर की जो परीक्षा CGPSC ने आयोजित कि उसमें 105 प्रश्नों को विलोपित कर दिया गया । इस पर अभ्यर्थियों का ये कहना है कि उनके द्वारा कई प्रकार के स्टैंडर्ड बुक को भी CGPSC को बताया गया लेकिन CGPSC के द्वारा मान्य नहीं किया गया । असिस्टेंट प्रोफेसर के एक्जाम में आपने देखा होगा 35 वां नंबर का प्रश्न था जिसमें तातापानी किस जिले में स्थित है पूछा गया था जिसमें ऑप्शन में सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर,सूरजपुर दिया गया था ।हैरानी तो तब हुई जब CGPSC का मॉडल उत्तर जारी हुआ । जिसमें प्रश्न क्रमांक 35 का उत्तर D मतलब सूरजपुर को सही बताया गया । तातापानी हमारे छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्थित है ये सभी को पता है लेकिन CGPSC जैसी संवैधानिक संस्था है जो बड़े बड़े एक्सपर्ट्स हॉयर करके उनको बड़ी लंबी चौड़ी फीस देती होगी उसके बावजूद इस प्रकार के प्रश्न का गलत उत्तर CGPSC जारी कर रही है तो ये हमारे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए दुर्भाग्य की बात है । जिसने भी इस प्रश्न का उत्तर बनाया उसका नाम सार्वजानिक करें और उसको तत्काल ब्लैकलिस्टेड किया जाए और उस पर कठोर कार्यवाही होना चाहिए अगर CGPSC वास्तव में सुधार लाना चाहती है तो ।

उसी प्रकार असिस्टेंट डायरेक्टर कृषि का जो एक्जाम हुआ था उसमें 150 प्रश्नों में से 14 प्रश्नों को विलोपित कर दिया गया था । इसके बाद CGPSC ने एक विज्ञप्ति जारी किया जिसमें उनका कहना था कि जितने भी विलोपित प्रश्न होते हैं हम उनका नंबर एड कर देते हैं । ओपी चौधरी जी का कहना है कि कितना समय उन प्रश्नों में अभ्यर्थियों का गया होता है अभ्यर्थियों के इस दर्द को वो स्वयं समझ सकता है , पर कोई ध्यान नहीं देता । जो प्रश्न विलोपित के हुए उसपर अभ्यर्थी अपना काफी समय दिमाग लगाता रहा जिस वजह से वह बाकी प्रश्नों को अटेम्प्ट न कर पाया हो तो जो समय बर्बाद हुआ यूं प्रश्नों के चक्कर में उसको कोई कैलकुलेट क्यों नहीं करता । आज परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा अलग अलग वर्गों के होते हैं जिनमें कई बीपीएल परिवार से, कई गरीब परिवार से लोग होते हैं जो अपना जमीन बेचकर इसकी तैयारी करते हैं वो भी सिर्फ इसीलिए क्योंकि उन्हें भारत के लोकतंत्र पर भरोसा होता है । लोकतंत्र में विश्वास को मजबूत बनाए रखने के लिए भर्ती एजेंसियों जैसे संवैधानिक संस्थाओं को विश्वास कायम रखते हुए इस प्रकार के सिस्टम में तुरंत सुधार करना चाहिए ।

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