सियासी सिंडिकेट के निशाने पर निगम आयुक्त अधिकारी पर दबाव बनाने राजनैतिक दलों की गलबहियां……

सियासी सिंडिकेट के निशाने पर निगम आयुक्त
अधिकारी पर दबाव बनाने राजनैतिक दलों की गलबहियां

रायगढ़ —- शहर मे नगर निगम की गतिविधियों पर नये सिरे से सिंडिकेट राजनीति जोर पकड रही है । हांलांकि इस नये सिंडिकेट मे भी निगम की सियासत के वही मंजे हुये चेहरे शामिल हैं किंतु इससे भी दुर्भाग्यजनक यह है कि अपनी शर्तों पर शहर सरकार और निगम प्रशासन के संचालन के आदी हो चुके छुटभैये नेता जनसरोकारों की आड मे अपनी बात मनवाने नगर निगम पर अपना दबदबा बढाने की फिराक मे है। पूरे सियासी खेल मे इस बार निशाने पर नगर निगम आयुक्त राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता बताये जा रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास मे आयुक्त राजेन्द्र गुप्ता न केवल अलाल और राजनेताओं के गुप्तचर सरीखे अधिकारियों – कर्मचारियों के नगाह मे चढे हुये हैं बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के पति – पत्नी , भाई-भाभी या अन्य सगे संबंधियों के नाम पर प्रशासनिक अपसरों पर अपना सियासी रौब गांठने वालों की भी अकड निकालने की कवायद मे राजेन्द्र गुप्ता नगर निगम के उस सिंडिकेट के निशाने पर हैं जिनमे प्रमुख दलों के कुछ असरदार तो कुछ खारिज किये हुये छुटभैये नेता शामिल हैं और जो वर्षों से राजनैतिक सामंजस्य के साथ निगम को प्राईवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर इस्तेमाल करने के आदी हो चुके हैं। इस सिंडिकेट प्रा. लि. के सियासतदार अपनी मंशा साधने शहर सरकार के प्रतिनिधियों , महापौर से लेकर विधायक और सांसद तक को अपनी जरुरत के मुताबिक इस्तेमाल करने की रणनीति मे भी कामयाब हो रहे हैं।
सियासी स्वार्थ की एक ताजा मिसाल तब सामने आई जब कुछ दिन पहले नगर निगम मे कुछ पार्षदों ने जरुरतमंदो की सहायता के लिए सामाजिक सहयोग से एकत्र किये गये भण्डार गृह को खोलकर राशन सामग्री के खराब होने पर आयुक्त को घेरने की न केवल कोशिश की बल्कि इस प्रकरण को कलेक्टर तक भी पंहुचाकर कार्रवाई तक की मांग उठा दी। इसके अलावा आयुक्त के नगर से बाहर होने के मामले मे भी सियासी प्रयोग खुलकर नजर आया। राजनैतिक सूत्रों की मानें तो इस आरोप प्रत्यारोप की सियासत मे निगम के पक्ष और विपक्ष दोनों दलों के कुशल रणनीतिकारों की साझा खुराफाती सोच है। अंदरखाने की खबर यह भी है कि निगम मे ही कांग्रेस का एक धडा लगातार स्वयं को महापौर से ज्यादा सक्षम और प्रभावकारी दर्शाने का भरपूर प्रयास कर रहा है। वहीं एक अन्य धडा नगर विधायक को शहर की छोटी मोटी राजनीति मे सीधे आगे कर अपना उल्लू साधते हुये विधायक की फजीहत भी करने मे संकोच नहीं कर रहा। सबसे बडी बात यह है कि नगर निगम के अखाडे मे जारी इस सियासी नूराकुश्ती मे लगे सियासी सिंडिकेट के द्वारा अपने संगठन के बडे नेताओं को भी बगैर विश्वास मे लिए ऐसी सियासी चाल रहे हैं कि शह और मात के खेल मे कई बार अपनी ही चाल के उल्टे वार झेलना पड रहे हैजबकि दूसरी तरफ अपनी लय मे निगम की प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने मे व्यस्त अनुशासन पसंद कमिश्नर राजेंद्र गुप्ता इन सियासी तिकडमों पर भी अब तक तो भारी पडते ही नजर आये हैं किंतु अब सिंडिकेट राजनीति के किस नये मुद्दे का निशाना आयुक्त बनते हैं और इस खींचतान से निकलने मे अपने प्रशासनिक अनुभव का कितना बेहतर इस्तेमाल कर पाते हैं , यह देखना दिलचस्प रहेगा।

वार्डों मे छिडी वर्चस्व की रार

निगम के पार्षदों के बीच अपने वार्डों मे वर्चस्व बनाने को लेकर रार छिडने की खबर है। जानकारी के मुताबिक बगैर आपसी सहमति और सूचना के वार्ड पार्षद एक दूसरे के वार्ड मे कभी जरुरतमंदों को राशन पंहुचा रहे हैं तो कहीं वार्डों को सेनेटाईज करने जैसे कारनामे अंजाम दिये जा रहे हैं। ऐसे ही एक मामले मे बीजेपी और कांग्रेस के समर्थकों मे कल गुत्थम गुत्था होने का भी शोर मचा था। इसके तुरंत बाद निगम सभापति ने एक बयान जारी करा वारोधीविरोधी खेमे को कडी चेतावनी देकर यह साबित कर दिया कि निगम प्रशासन को घेरने के लिए भले ही छुटभैये नेताओं ने सिंडिकेट बनाया हो लेकिन अपने वार्ड मे प्रभाव को लेकर कोई समझौता करने को तैयार नहीं । वहीं दूसरी तरफ भाजपा खेमे मे भी जनता से खारिज निगम की सियासत मे जमे कुछ नेताओं के द्वारा संगठन को बिना विश्वास मे लिए खुद को नई छवि के साथ स्थापीतस्थापित करने की रणनीति मे इस्तेमाल होने वाले पार्टी के पार्षद अब इसका एहसास होते ही खुद को प्रोपेगैंडा से अलग करते देखे जा रहे। दो दिन पहले ही आयुक्त निवास समेत कुछ और स्थानों को सेनेटाईज करने की खबरें दो ऐसे पार्षदों को सामने रखकर की गई जो कभी भाजपा के बागी माने जाते थे। पता चला है कि इसके बाद से पार्टी के समर्पित पार्षद व पदाधिकारी अपनी और पार्टी की फजीहत करने वाले सभी गतिविधियों से अपने को अलग करते जा रहे हैं।