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महामारी की चुनौती के बीच डीएम भीम सिंह ने बदली जिले की तस्वीर चुनौतियों को अवसर मे बदलकर साल भर मे हासिल की स्वर्णिम उपलब्धियां लाभार्थी योजनाओं से लेकर कोविड टीकाकरण तक मे

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रायगढ़ —– विकास के कई मायने हैं मगर सही मायने मे विकास का सार्थक स्वरुप तभी नजर आता है जब शासन अथवा प्रशासन स्थानीय जनता के मौलिक समस्याओं को समझकर योजनाएं बनाता और क्रियान्वित करता है। सकारात्मक योजनाओं के क्रियान्वयन से व्यवस्था मे सहज ही बदलाव दिखाई देता है। जिले मे भी ढांचागत सुधार से लेकर समाज के अंतिम तबके तक को हितैषी योजनाओं का लाभ दिलाने की जो उपलब्धिभरी तस्वीर पिछले एक साल मे सामने आई है वह जिले के ऊर्जावान डीएम भीम सिंह के दूरदर्शी सोच का साकार स्वरुप है। साल भर पहले 29 मई 2020 को हाउसिंग बोर्ड के निदेशक की कुर्सी छोड़ आईएएस भीम सिंह ने जिस वक्त रायगढ डीएम की जवाबदारी संभाली थी तब भी जिला रेड जोन मे था और कोरोना महामारी से जूझ रहा था। कलेक्टर का चार्ज संभालते ही स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की मैराथन बैठक लेकर आईएएस भीम सिंह ने न केवल कोविड सुरक्षा की तैयारियों की समीक्षा की बल्कि महामारी का संक्रमण रोकने और जिले को सुरक्षित करने ठोस रणनीति पर काम करना शुरु किया। तबसे लेकर अब तक कलेक्टर भीम सिंह का एक वर्ष का कार्यकाल महामारी के बीच ही विकास के नये आयाम गढने मे बीता है । खास बात यह है कि रायगढ मे कलेक्टर की कुर्सी संभालने के बाद बगैर एक भी दिन अवकाश लिये पूरे 365 दिन काम करने वाले भीम सिंह संभवतः प्रदेश के इकलौते डीएम हैं।
कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए उल्लेखनीय कार्ययोजनाओं के निष्पादन को प्राथमिकता मे रखते हुये डीएम भीम सिंह ने जिले को कोविड -19 की पहली और फिर दूसरी लहर से भी तकरीबन उबार लिया है। इस प्राकृतिक आपदा मे भी चुनौतियों को अवसर मे बदल कर जिलाधिकारी ने जिले के विकास मे भी भरपूर ऊर्जा झोंकी। आईएएस भीम सिंह के गंभीर प्रयासों का परिणाम गांव के खेत से लेकर शहर के हाईवे तक नजर आया। किसान हितैषी योजनाओं के पंजीयन, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व भुगतान , वनवासी आबादी पट्टा वितरण, आनलाईन पढाई की शुरुआत , मनरेगा मे नये रोजगार सृजन , राशन वितरण समेत राज्य शासन की महती सुराजी ग्राम योजना के क्रियान्वयन मे कलेक्टर भीम सिंह ने अपेक्षा से बढकर बेहतर परिणाम दिये। साल के आरंभ मे मुख्यमंत्री ने स्वयं जिले मे आकर डीएम की पीठ थपथपाई तो विडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान भी कलेक्टर भीम सिंह के कार्यो की तारीफ मुख्य सचिव व राज्य के मंत्रियों ने भी बार – बार की।

माॅडल स्कूल और कुपोषण मिटाने मे भी आगे —-
शासकीय स्कूलों मे अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरु करने की राज्य शासन की योजना जिले मे डीएम भीम सिंह के पदस्थापना के साथ ही तेज हुई। माॅडल स्कूल विकसित करने मे कलेक्टर भीम सिंह ने पूरी कार्ययोजना का संचालन स्वयं किया । इसी का नतीजा है कि साल के भीतर जिले के प्रत्येक ब्लाक मे माॅडल अंग्रेजी विद्यालय की शुरुआत हो गई। इसके अलावा जिले मे कुपोषण की दर घटकर महज 8 फीसद होना भी जिलाधिकारी भीम सिंह के उन महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश मे हुई। लाकडाऊन और महामारी संक्रमण के कारण आंगनबाड़ी केन्द्र बंद होने से ताजे और पौष्टिक भोजन का टिफिन घर घर भेजने का माॅडल भी रायगढ के संवेदनशील कलेक्टर की सोच का परिणाम है। जिले की खस्ताहाल सडकों को सुधारने के लिए भीम सिंह ने जवाबदार लडाई लडकर सडकों की मरम्मत व निर्माण का रास्ता साफ किया। शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए गली मोहल्ले की परिक्रमा करने वाले भीम सिंह पहले कलेक्टर के तौर पर पहचाने गये।

गांव – गांव का दौरा , जन -जन से संवाद

अपने 365 दिनों के अथक कार्यकाल के दौरान कलेक्टर भीम सिंह विकास के दावों की हकीकत जानने उन गांवों तक भी पंहुचे जहां आज तक कोई आईएएस कभी नहीं गया था। करीब एक दर्जन गांव के लोगों ने भीम सिंह को देखने के पहले कलेक्टर का केवल नाम सुना था। विकास से कोसों दूर पहाडों और जंगलों मे बसे आदिवासीयों तक भीम सिंह ने पैदल पंहुचकर न केवल मुलाकात की बल्कि इन इलाकों मे बुनियादी तथा आवश्यक विकास कार्यों की लकीर भी खींची। लैलूंगा के जैविक जौफूल को अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड बनाने की कवायद और रागी की फसल को सर्वाधिक समर्थन मूल्य दिलाने के पीछे भी डीएम भीम सिंह की अहम भूमिका है। जन चौपाल लगाकर जिले की समस्या सुनने से लेकर सीएम हेल्प लाईन के माध्यम से मिली शिकायतों के सर्वाधिक त्वरित निराकरण करने मे आईएएस भीम सिंह का नाम प्रदेश के टाप ब्यूरोक्रेट्स मे दर्ज है। जिले मे कलेक्टर भीम सिंह की छवि कुछ ऐसी बन गई है कि न्याय और राहत की उम्मीद रखने वाले अब जनप्रतिनिधियों की ड्योढी पर मत्था टेकने से ज्यादा डीएम कार्यालय मे आवेदन देने मे ज्यादा विश्वास करने लगे हैं।

महामारी पर विजय अभियान जारी ——–
कोविड की पहली लहर के दौरान जिलाधिकारी भीम सिंह की ओर से की गई तैयारियां दूसरी लहर मे संजीवनी साबित हुई। समय रहते आवश्यक स्वास्थ सुविधाओं मे सुधार महामारी से बचाव का कारगर माध्यम बना। विगत चार माह से जिले मे कोरोना महामारी की दूसरी लहर प्रभावी है। ऐसे मे लाकडाऊन लागू कर आम लोगों को घरों मे कैद कर डीएम भीम सिंह पूरी प्रशासनिक टीम के साथ महामारी नियंत्रण मे प्रतिबद्धता के साथ जुटे हैं। नये कोविड अस्पताल बढाने से लेकर अस्पताल मे बेड व ईलाज की सुविधाएं बढाने के लिए आईएएस भीम सिंह ने महानगरों से सीधे सम्पर्क साधकर आधुनिक मशीने व अन्य संसाधन जिले के सुपुर्द किये हैं। कोरोना के ईलाज,दवा और मरीजों की देखभाल से लेकर तमाम व्यवस्थाओं की निगरानी डीएम भीम सिंह स्वंय कर रहे हैं। कलेक्टर की दूरदर्शी सोच और सार्थक कार्ययोजना का असर है कि लगभग डेढ माह तक पूरी तरह बंद रहा जिला अब धीरे धीरे खुलने की कगार पर आ पंहुचा है। कलेक्टर की संवेदनशीलता का परिणाम है कि कोविड टीकाकरण मे भी रायगढ प्रदेश के अन्य जिलों से बहुत आगे है। कोरोनाकाल मे कलेक्टर के निर्देशन व मार्गदर्शन मे स्वास्थ्य विभाग समेत सभी प्रशासनिक विभागों ने जिस संकल्प के साथ महामारी की चुनौती से जूझने का माद्दा दिखाया है ,उसके प्रेरणास्त्रोत भी जिलाधिकारी भीम सिंह ही हैं जो स्वयं कोविड पॉजिटिव होते हुए भी कर्तव्य फथ पर डटे रहे और पूरे तंत्र को लय मे बनाये रखा।

इस एक साल मे भीम सिंह ने बतौर कलेक्टर जिले को महामारी से सुरक्षित रखने की चुनौती के बीच तमाम विकास योजनाओं के क्रियान्वयन मे जिस गंभीरता और संवेदनशीलता का परिचय दिया है , उसने जन जन के बीच कलेक्टर की लोकप्रियता बढा दी है। जिले का सौभाग्य है कि वैश्विक आपदा के बीच भीम सिंह का नेतृत्व मिला और इस आपदा को भी अवसर मे बदलकर सुरक्षा और विकास का साझा तालमेल एक मिसाल के तौर पर पूरे साल धरातल पर नजर आता रहा।

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